A I रोकेगा Gurugram में जलभराव : बारिश आने पर नहीं डूबेंगी सड़कें, जाने नया प्लान
गुरुग्राम के हॉटस्पॉट्स (संवेदनशील इलाकों) में 'मेड-इन-इंडिया' फ्लड सेंसर लगाए जाएंगे। ये सेंसर न केवल पानी के स्तर को मापेंगे, बल्कि ड्रेनेज पाइपों में जमा सिल्ट और कचरे की जानकारी भी कंट्रोल रूम को देंगे।

Gurugram : हर साल मानसून में ‘झील’ बन जाने वाले गुरुग्राम को जलभराव से मुक्ति दिलाने के लिए नगर निगम (MCG) ने एक हाई-टेक मास्टरप्लान तैयार किया है। IIT गांधीनगर के साथ मिलकर शहर में ‘रेन-टू-रेज़िलिएंस’ (Rain-to-Resilience) पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। अब मानसून की बारिश से पहले ही वैज्ञानिक मॉडलिंग और स्मार्ट सेंसरों के जरिए यह पता चल जाएगा कि शहर के किस कोने में कितना पानी जमा होने वाला है।
इस परियोजना के तहत गुरुग्राम के हॉटस्पॉट्स (संवेदनशील इलाकों) में ‘मेड-इन-इंडिया’ फ्लड सेंसर लगाए जाएंगे। ये सेंसर न केवल पानी के स्तर को मापेंगे, बल्कि ड्रेनेज पाइपों में जमा सिल्ट और कचरे की जानकारी भी कंट्रोल रूम को देंगे। एक्वा ट्विन और रेन-टू-फ्लड प्लेटफॉर्म के जरिए बाढ़ का सटीक पूर्वानुमान मिलेगा। नगर निगम की टीमें डेटा के आधार पर जलभराव होने से पहले ही सक्रिय हो सकेंगी। पूरा डेटा भारत में ही सुरक्षित सर्वरों पर रहेगा, जो डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन कानून के अनुरूप है।
परियोजना के पहले 12 महीनों के लिए सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म मुफ्त रहेंगे। नगर निगम केवल हार्डवेयर (सेंसर) पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च करेगा। एक सेंसर की कीमत करीब 1 लाख रुपये है। पायलट की सफलता के बाद, इसे पूरे शहर में SaaS (सॉफ्टवेयर-एज़-ए-सर्विस) मॉडल पर विस्तार दिया जाएगा, जिससे गुरुग्राम देश का पहला ‘डेटा-ड्रिवन’ बाढ़ मुक्त शहर बन सकता है।










